Wednesday, 25 November 2015

How to Grow Wheatgrass & Make Wheatgrass Juice at Home : गेंहूं के जवारे : कारगर प्राकृतिक उपाय , जब और कुछ काम ना आये

                     How to Grow Wheatgrass & Make Wheatgrass Juice at Home   


गेहूँ के जवारे एक अनुपम औषधि है, गेहूं के पौधे में ईश्वरप्रदत्त अपूर्व गुण है। हम लोग बारहों मास भोजन गेहूं का प्रयोग करते हैं, पर उसमें क्या गुण हैं, यह हम नहीं जानते रोगनाशक हैं| गेहूँ के मिटटी के अंदर बौने पर जो एक ही पत्ता उगकर ऊपर आता है उसे ज्वारा कहते है इसे मिट्टी के छोटे बर्तन में बोया जा सकता है गेहूं के ज्वारे का रस बहुत ही उपयोगी होता है ! इस रस के द्वारा अनेक असाध्य रोगो को दूर किया जा सकता है ! हम हर छोटी बड़ी बीमारी होते ही डॉक्टर के पास जाते हैं लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि नेचरोपेथी से ईलाज करना कितना लाभदायक होता है। ऎसे ही हम गेहूं के जवारे उगा कर और उसका रस पी कर कई रोगों को दूर भगा सकते हैं। इसके जूस में मौजूद क्लोरोफिल काफी फायदेमंद होता है। यह शरीर से विषैले पदार्थो को बाहर निकालकर शरीर की सफाई करता है। इससे पाचन प्रक्रिया में सुधार होता है। ये आवश्यक नहीं कि आप बीमार हों तो ही इसका रस पीएं। अब हर दिन इसका सेवन कर सकते हैं, ये गुण ही करेगा। तो चलिए सीखते हैं घर पर ही गेंहूं के जवारे उगाना और उसका जूस निकलना|

       जवारे उगाने के लिए आवश्यक सामग्री:-                                                                   

1- गेंहूं – 100 ग्राम
2-मिट्टी के खप्पर/ गमले/ टोकरी - 7

       जवारे उगाने की विधि :                                                                                      


1-सर्वप्रथम (प्रति व्यक्ति)100 ग्राम गेहूं लें |
2-गेंहूं को 24 घंटे के लिए पानी में भिगोयें |
3-उसके बाद उन्हें एक मोटे सूती कपडे में बांधकर अँधेरे वाली जगह में 12 घंटे के लिए रख दें, जिससे उनमे अंकुरण हो जायेगा.
4-24 घंटे के बाद अब हम गमले में या टोकरी में गेंहूं को बोएंगे |
5-इसके लिए आप ऐसी कोई भी वस्तु जिसमे ३ इंच मिटटी आ सके लें, और उसको आप गमले के रूप में प्रयोग करें |
6-जवारे बोने के लिए रेतीली मिटटी ज्यादा उपयोगी रहेगी| परन्तु यदि रेतीली मिट्टी उपलब्ध न हो तो आप किसी भी प्रकार की मिट्टी का उपयोग जवारे बोने के लिए कर सकते हैं |
7-इसके बाद आप मिट्टी में पानी व खाद डालें और अपने हाथों की सहायता से उसे भुरभुरा करे |
8-तत्पश्चात मिटटी पर गेहूं बिछा दें व उसके ऊपर हल्की सी मिटटी डालकर पूरी तरह से ढक दें|
9-इसके ऊपर हल्का सा पानी का छिडकाव कर दें| ज्यादा पानी मत डालियेगा| जवारे वाली टोकरी को  छाया में रखें।
10-ध्यान रहे कि सूर्य की धूप कुंडे/टोकरी/गमले  पर ज्यादा और सीधी ना लगे।
11-इन जवारों की टोकरियों में रोजाना पानी दें।
12-इसी तरह आप सात दिन तक रोज एक टोकरी बोयें |
13-सातवें दिन आप पहले दिन बोई गयी टोकरी के जवारों को काटकर उसका रस निकाल ले ।
14-इसी तरह आप टोकरी के जवारे काटें और अगले दिन खाली हुई टोकरी में जवारे बो दें|

       जवारे का रस निकालने के लिए आवश्यक सामग्री:-                                                   

1- पानी – आवश्यकतानुसार
2-मलमल का कपडा – रस छानने के लिए
3-शहद , अदरक – स्वादानुसार

       जवारे का रस निकालने की विधि :-                                                                       


1-सर्वप्रथम जवारो को केंची की सहायता से टोकरी में से काट लें |
2-जवारे काटने के तुरन्त बाद इन्हें धो डालें।
3-जवारों को अच्छी तरह से धोने के बाद छोटे- छोटे टुकड़ों में काट लें |
4-फिर इन्हें आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर मिक्सी (बेहतर होगा मिक्सी के स्थान पर सिल बट्टे पर चटनी बना ले और उसमे थोडा सा पानी मिलकर पि जायें) में पीस लें ।
5-यदि आप जवारे का जूस बिना कोई अतिरिक्त चीज मिलाये पिए तो काफी फायदेमंद होता है परन्तु यदि आपको उसका स्वाद अच्छा न लगे तो आप इसमें शहद या अदरक भी डाल सकते हैं|
6-जवारे अच्छी तरह से पीस लेने के बाद आप उसको मलमल के कपडे की सहायता से छान लें |
7-छाने हुए जूस को घूँट-घूँट करके पीएं।
8-इसे हमेशा ताजा (निकलने के २० मिनट के अन्दर) ही पीएं क्योंकि इसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। 


       सुझाव :-                                                                                                     

 

1-व्यसक लोग 50 से 100 ml जूस प्रतिदिन पियें.
2-छोटे बच्चों को २ बूँद उनकी जीभ पर डालकर दे सकते हैं. 
3-इसको सिर्फ 21 दिन प्रयोग करने से ही आपको स्वयं अनुभव होगा कि आप की बीमारी में अद्भुत लाभ हो रहा है, और अब आप जल्दी बीमार नहीं होंगे| (21 दिन करने के लिए पहले 7 दिन प्रतिदिन 100 ग्राम गेहूं एक गमले में बोयें, 8 वे दिन से गमले रोटेशन में आ जायेंगे) सिर्फ 21 दिन नही करना है, आजीवन इसको करने से लम्बी आयु व निरोगी शरीर का लाभ प्राप्त करें|

       सस्ता और सर्वोत्तम :-                                                                                   


1-ज्वारों का रस दूध, दही और मांस से अनेक गुना अधिक गुणकारी है। दूध और मांस में भी जो नहीं है उससे अधिक इस ज्वारे के रस में है। इसके बावजूद दूध, दही और मांस से बहुत सस्ता है। घर में उगाने पर सदैव सुलभ है। गरीब से गरीब व्यक्ति भी इस रस का उपयोग करके अपना खोया स्वास्थ्य फिर से प्राप्त कर सकता है। गरीबों के लिए यह ईश्वरीय आशीर्वाद है। नवजात शिशु से लेकर घर के छोटे-बड़े, अबालवृद्ध सभी ज्वारे के रस का सेवन कर सकते हैं। नवजात शिशु को प्रतिदिन पाँच बूँद दी जा सकती है।

2-ज्वारे के रस में लगभग समस्त क्षार और विटामिन उपलब्ध हैं। इसी कारण से शरीर मे जो कुछ भी अभाव हो उसकी पूर्ति ज्वारे के रस द्वारा आश्चर्यजनक रूप से हो जाती है। इसके द्वारा प्रत्येक ऋतु में नियमित रूप से प्राणवायु, खनिज, विटामिन, क्षार और शरीरविज्ञान में बताये गये कोषों को जीवित रखने से लिए आवश्यक सभी तत्त्व प्राप्त किये जा सकते हैं।

3-डॉक्टर की सहायता के बिना गेहूँ के ज्वारों का प्रयोग आरंभ करो और खोखले हो चुके शरीर को मात्र तीन सप्ताह में ही ताजा, स्फूर्तिशील एवं तरावटदार बना दो।

4-आरोग्यता के लिए भाँति-भाँति की दवाइयों में पानी की तरह पैसे बहाना करें। इस सस्ते, सुलभ तथापि अति मूल्यवान प्राकृतिक अमृत का सेवन करें और अपने तथा कुटुंब के स्वास्थ्य को बनाये रखकर सुखी रहें।


        नोट:-                                                                                                            

वैसे दिन में किसी भी समय जवारों का रस पीया जा सकता हैलेकिन खाली पेट यह रस पीने से ज्यादा फायदा होता है। रस लेने के आधा घंटा पहले और लेने के आधे घंटे बाद तक कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए। जवारों के रस में नमक या नींबू ना डालें।


अपने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए इससे आसान व सस्ता विकल्प कोई नहीं हो सकता. 
तो हो जाइये शुरू और रहिये स्वस्थ...

इस पोस्ट में प्रयुक्त चित्र google image से लिए गए हैंयदि किसी को इससे कोई आपत्ति/शिकायत  है तो vsmskb@gmail.com पर संपर्क करे |

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