Tuesday, 29 December 2015

Carom Seed: Natural cures and home remedies for Good health : अजवाइन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें क्योंकि अनोखे गुण वाली है अजवायन

               


अजवाइन के गैर-सेप्टिक गुण की वजह से आप इसे कटने या इंफेक्शन होने पर इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप लंबे समय से खाँसी या जुकाम से परेशान हैं तो इसके ये गुण बहुत फायदेमंद हैं। अस्थमा के मरीजों को भी ये बीज फायदा पहुँचाते हैं।
पहले जब दवाओं का विज्ञान इतना विकसित नहीं था तब अजवाइन ही कई तरह की बीमारियों में आयुर्वेदिक दवा की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा है। अपच जैसी समस्याओं का अजवाइन एक बेहतरीन इलाज है।
        कैसे करें अजवाइन का इस्तेमाल?                                                               


आप अजवाइन का कई तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं। एक तरीका यह है कि इसे एक कप पानी में पानी आधा होने तक उबालें और छानकर इस पानी को पिएँ। गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह बहुत ही फायदेमंद है। पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के अलावा यह सूजन आने में भी दवा का काम करता है।
आप अजवाइन के कुछ दानों को गुड़ के साथ पीसकर इस्तेमाल कर सकते हैं। इस्तेमाल पर ये कॅाफी का स्वाद देता है। कुछ बीजों को लेकर कपड़े में बांध लें और गरम प्लेट पर रखकर गर्माएं। इसका इस्तेमाल सांस लेने में होने वाली तकलीफों में करें। इस गरम पैक को अब छाती पर धीरे धीरे  लगाएँ इससे सांस न ले पाने की समस्या में आराम मिलेगा।

        अजवाइन के कुछ अन्य लाभ :-                                                                  


[मिट्टी या कोयला खाने की आदत :- एक चम्मच अजवाइन का चूर्ण रात में सोते समय नियमित रूप से हफ्ते तक खिलाएं। इससे बच्चों की मिट्टी खाने की आदत छूट जाती है।
[पेट में दर्द :- एक ग्राम काला नमक और ग्राम अजवाइन गर्म पानी के साथ सेवन कराएं।
[बिस्तर में पेशाब करना :- सोने से पूर्व ग्राम अजवाइन का चूर्ण कुछ दिनों तक नियमित रूप से खिलाएं।
[पाचक चूर्ण :- अजवाइन और हर्र को बराबर मात्रा में लेकर हींग और सेंधानमक स्वादानुसार मिलाकर अच्छी तरह से पीसकर सुरक्षित रख लें। भोजन के पश्चात् 1-1 चम्मच गर्म पानी से लें।  
[मुंहासे :- 2 चम्मच अजवाइन को चम्मच दही में पीसकर रात में सोते समय पूरे चेहरे पर मलकर लगाएं और सुबह गर्म पानी से साफ कर लें।
[अपचमंदाग्नि में (पाचन शक्ति में) :भोजन के बाद नियमित रूप से चम्मच सिंकी हुई व सेंधानमक लगी अजवाइन चबाएं।
[जूंलीख :- 1 चम्मच फिटकिरी और चम्मच अजवाइन को पीसकर कप छाछ में मिलाकर बालों की जड़ों में सोते समय लगाएं और सुबह धोयें। इससे सिर में होने वाली जूं और लीखें मरकर बाहर निकल जाती हैं।
[पुराना बुखारमन्द ज्वर :- 15 ग्राम की मात्रा में अजवाइन लेकर सुबह के समय मिट्टी के बर्तन में कप पानी में भिगो दें। इस बर्तन को दिन में मकान में और रात को खुले आसमान के नीचे ओस में रखें। दूसरे दिन इसको सुबह के समय छानकर इस पानी को पी लें। यह प्रयोग लगातार 15 दिनों तक करें। यदि बुखार पूरी तरह से न उतरे तो यह प्रयोग कुछ दिनों तक और भी चालू रखा जा सकता है। इस उपचार से पुराना मन्द ज्वर ठीक हो जाता है और यदि यकृत और तिल्ली बढ़ी हुई हो तो वह भी ठीक हो जाते हैं साथ ही साथ भूख खुलकर लगने लगती है।
[बांझपन (गर्भाशय के न ठहरनेपर :- मासिक-धर्म के आठवें दिन से नित्य अजवाइन और मिश्री 25-25 ग्राम की मात्रा में लेकर 125 ग्राम पानी में रात्रि के समय एक मिट्टी के बर्तन में भिगों दें तथा प्रात:काल के समय ठंडाई की भांति घोंट-पीसकर सेवन करें। भोजन में मूंग की दाल और रोटी बिना नमक की लें। इस प्रयोग से गर्भ धारण होगा।
[खटमल :- चारपाई के चारों पायों पर अजवाइन की पोटली बांधने से खटमल भाग जाते हैं।
[मच्छर :- अजवाइन पीसकर बराबर मात्रा में सरसों के तेल में मिलाकर उसमें गत्ते के टुकड़ों को तर (भिगो) करके कमरे में चारों कोनों में लटका देने से मच्छर कमरे से भाग जाते हैं।
[भोज्य पदार्थों के लिए :- पूरीपरांठे आदि कोई भी पकवान होउसको अजवाइन डालकर बनाएं। इस प्रकार के भोजन को खाने से पाचनशक्ति बढ़ती है और खाई गई चीजें आसानी से पच जाती हैं। पेट के पाचन सम्बन्धी रोगों में अजवाइन लाभदायक है।
[कर्णशूल (कान दर्द) :- 10 ग्राम अजवाइन को 50 मिलीलीटर तिल के तेल में पकाकर सहने योग्य गर्म तेल को 2-2 बूंद कान में डालने से कान का दर्द मिट जाता है।
[सर्दी-जुकाम :- पुदीने का चूर्ण 10 ग्रामअजवाइन 10 ग्रामदेशी कपूर 10 ग्राम तीनों को एक साफ शीशी में डालकर अच्छी प्रकार से डॉट लगाकर धूप में रखें। थोड़ी देर में तीनों चीज गलकर पानी बन जायेगी। इसकी 3-4 बूंद रूमाल में डालकर सूंघने से या 8-10 बूंद गर्म पानी में डालकर भाप लेने से तुरंत लाभ होता है।
[उल्टी-दस्त :- पुदीने का चूर्ण 10 ग्रामअजवाइन का चूर्ण 10 ग्रामदेशी कपूर 10 ग्राम तीनों को एक साफ शीशी में डालकर अच्छी प्रकार से डॉट लगाकर धूप में रखें। थोड़ी देर में तीनों चीज गलकर पानी बन जायेंगी। इसकी 4-5 बूंदें बताशे में या गर्म पानी में डालकर आवश्यकतानुसार देने से तुरंत लाभ होता है। एक बार में लाभ न हो तो थोड़ी-थोड़ी देर में दो-तीन बार दे सकते हैं।
[अतिसार :- पुदीने का चूर्ण 10 ग्रामअजवाइन का चूर्ण 10 ग्रामदेशी कपूर 10 ग्राम तीनों को एक साफ शीशी में डालकर अच्छी प्रकार से डॉट लगाकर धूप में रखें। थोड़ी देर में तीनों चीज गलकर पानी बन जायेंगी। इसकी से बूंद बताशे में देने से मरोड़पेट में दर्दश्वासगोलाउल्टी आदि बीमारियों में तुरंत लाभ होता है।
[कीट दंश :- पुदीने का चूर्ण 10 ग्रामअजवाइन का चूर्ण 10 ग्रामदेशी कपूर 10 ग्राम तीनों को एक साफ शीशी में डालकर अच्छी प्रकार से डाट लगाकर धूप में रखें। थोड़ी देर में तीनों चीजें गलकर पानी बन जायेंगी। इसको बिच्छूततैयाभंवरीमधुमक्खी इत्यादि जहरीले कीटों के दंश पर भी लगाने से शांति मिलती है।
[प्रमेह (वीर्य विकार) :- अजवाइन ग्राम को 10 मिलीलीटर तिल के तेल के साथ दिन में सुबहदोपहर और शाम सेवन करने से लाभ होता है।
[गुर्दे का दर्द :- ग्राम अजवाइन का चूर्ण सुबह-शाम गर्म दूध के साथ लेने से गुर्दे के दर्द में लाभ होता है।
[नपुंसकता (नामर्दी) :- 3 ग्राम अजवाइन को सफेद प्याज के 10 मिलीलीटर रस में तीन बार 10-10 ग्राम शक्कर मिलाकर सेवन करें। 21 दिन में पूर्ण लाभ होता है। इस प्रयोग से नपुंसकताशीघ्रपतन व शुक्राणु की कमी के रोग में भी लाभ होता है।
[सुजाक (गिनोरियाके रोग में :- अजवाइन के तेल की बूंदे ग्राम शक्कर में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करते रहने से तथा नियमपूर्वक रहने से सुजाक में लाभ होता है।
[चोट लगने से उत्पन्न सूजन :- किसी भी प्रकार की चोट पर 50 ग्राम गर्म अजवाइन को दोहरे कपड़े की पोटली में डालकर सेंक करने से आराम आ जाता है। जरूरत हो तो जख्म पर कपड़ा डाल दें ताकि जले नहीं। किसी भी प्रकार की चोट पर अजवाइन का सेंक बहुत ही लाभकारी होती है।
[मलेरिया बुखार :- मलेरिया बुखार के बाद हल्का-हल्का बुखार रहने लगता है। इसके लिए 10 ग्राम अजवाइन को रात में 100 मिलीलीटर पानी में भिगो दें और सुबह पानी गुनगुना कर जरा सा नमक डालकर कुछ दिन तक सेवन करें।
[बच्चों के पैरों में कांटा चुभने पर :- कांटा चुभने के स्थान पर पिघले हुए गुड़ में पिसी हुई अजवाइन 10 ग्राम मिलाकर थोड़ा गर्म कर बांध देने से कांटा अपने आप निकल जायेगा।
[पित्ती उछलना :- 50 ग्राम अजवाइन को 50 ग्राम गुड के साथ अच्छी प्रकार कूटकर 5-6 ग्राम की गोली बना लें। 1-1 गोली सुबह-शाम ताजे पानी के साथ लेने से सप्ताह में ही तमाम शरीर पर फैली हुई पित्ती दूर हो जायेगी।
[आमवात :- अजवाइन का रस जोड़ों पर मालिश करने से दर्द दूर हो जाता है।
[शक्तिवर्धक चूर्ण :- अजवाइनइलायचीकालीमिर्च और सौंठ समान मात्रा में पी लें। आधा चम्मच सुबहशाम पानी के साथ फंकी लें।
[हृदय (दिलशूल :- हृदय के दर्द में अजवाइन देने से दर्द बंद होकर हृदय उत्तेजित होता है।
[फोडे़फुन्सी की सूजन :- अजवाइन को नींबू के रस में पीसकर फोड़े और फुन्सी की सूजन में लेप करने से लाभ मिलता है।
[आन्त्रवृद्धि :- अजवाइन का रस 20 बूंद और पोदीने का रस 20 बूंद पानी में मिलाकर पीने से आन्त्रवृद्धि में लाभ होता है।
[वात-पित्त का बुखार :- अजवाइन ग्रामछोटी पीपल ग्रामअडूसा ग्राम और पोस्त का डोडा ग्राम लेकर काढ़ा बना लेंइस काढ़े को पीने से कफ का बुखारश्वास (दमा) और खांसी दूर हो जाती है।
[जुकाम के साथ-साथ हल्का बुखार :- देशी अजवाइन ग्रामसतगिलोए ग्राम को रात में 150 मिलीलीटर पानी में भिगोकरसुबह मसल-छान लें। फिर इसमें नमक मिलाकर दिन में बार पिलाने से लाभ मिलता है।
[फेफड़ों की सूजन :- लगभग आधा ग्राम से लगभग ग्राम खुरासानी अजवायन का चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से फेफड़ों के दर्द व सूजन में लाभ मिलता है।
[काली खांसी (हूपिंग कफ) :- जंगली अजवाइन का रससिरका और शहद तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर चम्मच रोजाना 2-3 बार सेवन करने से पूरा लाभ मिलता है।
[अंजनहारीगुहेरी :- अजवाइन का रस पानी में घोलकर उस पानी से गुहैरी को धोने से गुहेरी जल्दी ठीक हो जाती है।
[बालों को हटाना :- खुरासानी अजवाइन और अफीम आधा-आधा ग्राम लेकर सिरके में घोट लें। इसे बालों में लगाने से बाल उड़ जाते हैं।
[खट्टी डकारें आना :- अजवाइनसेंधानमकसेंचर नमकयवाक्षारहींग और सूखे आंवले का चूर्ण आदि को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम शहद के साथ चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।
[आंखों की दृष्टि के लिए :- आंखों की रोशनी तेज करने के लिए जंगली अजवाइन की चटनी बनाकर खाना चाहिए।
[मसूढ़ों का रोग :अजवाइन को भून व पीसकर मंजन बना लें। इससे मंजन करने से मसूढ़ों के रोग मिट जाते हैं।
[अधिक भूख के (अतिझुधा भस्मकरोग में :- 20-20 ग्राम अजवाइन और सोंठ, 5 ग्राम नौसादर एक साथ पीस-छानकर नींबू के रस में मटर की तरह गोली बनाकर छाया में सुखा लें। 2-2 गोली सुबह-शाम पानी के साथ प्रयोग करें।
[स्तिशोथ :- जंगली अजवाइन का काढ़ा सिरका और शहद के साथ लेने से वस्तिपीड़ा और नाभि के नीचे की सूजन ठीक हो जाती है।
[हिचकी का रोग :अजवाइनजीरे का चूर्णसेंधानमक सबको एक साथ पीस लें। इसमें से चुटकी चूर्ण ताजे पानी के साथ लेने से हिचकी में लाभ होता है।
[बहरापन :- अजवाइन से बने तेल को रोजाना कान में डालने से बहरापन दूर हो जाता है।
[कष्टार्तव (मासिक धर्म का कष्ट के साथ आना) :- 10 ग्राम अजवाइन को 100 ग्राम गुड़ के साथ लोहे की कड़ाही में घी डालकर हलवा बनायें। इस हलवे को 2-3 बार सेवन करने से मासिक धर्म की पीड़ा नष्ट हो जाती है।
[संग्रहणी :- अजवाइनबेल की जड़कैथ की जड़सोनापाढ़ा की जड़कटाई अरनी की जड़छोटी कटाईसहजन की जड़सोंठपीपलचकभिलावांपिप्पलीमूलजवाखाना तथा पांचों नमक को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से चुटकी सुबह-शाम लेने से संग्रहणी अतिसार के रोगी का रोग दूर हो जाता है।
[चोट लगने पर :- 50 ग्राम अजवाइन गर्म करके उसे दोहरे कपड़े की पोटली में डालकर उससे सेंक करे। सेंकने से पहले जख्मी स्थान पर कपड़ा डाल दें ताकि वहां की त्वचा न जल सके। इस तरह घंटे तक सेंक करने से आराम मिल जाता है। आवश्यकता हो तो इस क्रिया को दोहराया जा सकता है। किसी भी तरह की चोट पर अजवाइन का सेंक करने से लाभ मिलता है।
[कान की पुरानी सूजन में :- अजवाइन के काढ़े से या अजवाइन के सत् (एक्सरैक्ट) को पानी में मिलाकर रोजाना से बार कान को साफ करने से या रोजाना बूंदे 3-4 बार कान में डालने से जल्दी आराम आता है।
[कान में कुछ पड़ जाना :- अजवाइन के पत्तों के रस को कान में डालने से कान में घुसे हुए कीड़े-मकोड़े समाप्त हो जाते हैं।
[आंवरक्त (आंवयुक्त पेचिशहोने पर :- 3 ग्राम अजवाइन को पानी में पीसकर गोली बना लें। फिर इन गोलियों को खाने से पेचिश के रोगी का रोग दूर हो जाता है।
[जिगर का रोग :- 2 ग्राम पिसी अजवाइन, 1 ग्राम पिसी सोंठ को कप पानी में रात को भिगोएंसुबह इसे मसलकर छान लें और कम गर्म करके पीयें। इस प्रयोग को 15 दिन तक लगातार करें। इससे यकृत के रोग से लाभ होता है।
[अम्लपित्त :- चम्मच पिसी हुई अजवाइन, 1 गिलास पानी और नींबू का रस मिलाकर पीने से अम्लपित्त में लाभ होता है।
[पाचन क्रिया का खराब होना :- अजवाइन का रस या पुनर्नवा का रस या मकोए का रस एक तिहाई कप में पानी मिलाकर भोजन के बाद दिन में सुबह और शाम प्रयोग करें।
[मोटापे के रोग में :- अजवाइन 20 ग्रामसेंधानमक 20 ग्रामजीरा 20 ग्रामकालीमिर्च 20 ग्राम की मात्रा में कूटकर छानकर रख लें। रोजाना एक पुड़िया सुबह खाली पेट छाछ के साथ पीयें। यह प्रयोग शरीर में चर्बी को कम करके मोटापा दूर कर देता है।
[रक्तपित्त :- अजवाइन ग्रामपिपरमेंट 10 दाने और गुड़ 10 ग्राम। तीनों को मिलाकर दो खुराक बनायें तथा सुबह-शाम इसका प्रयोग करें। इससे रक्तपित्त खत्म हो जाता है।
[नाक के कीड़े :- खुरासानी अजवाइन के काढ़े से नाक के जख्म को साफ करने से दर्द कम हो जाता है।
[पाला मारना :- अजवाइन का चूर्ण बनाकर शरीर व हाथ-पैर की मालिश करने से शरीर का ताप बढ़ जाता है।
[वात रोग :- खुरासानी अजवाइन का प्रयोग गठियाघुटने के रोग की सूजन में बहुत ही फायदेमंद होती है।
[आक्षेप (बेहोशी अवस्था में कांपना) :- लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग खुरासानी अजवाइन सुबह और शाम को खाने से आक्षेपमिर्गी और अनिद्रा में बहुत लाभ प्राप्त होता है।
[गुल्म (वायु का गोला) :- अजवाइन का चूर्ण और थोड़ा-सा संचर नमक छाछ (मट्ठे) में मिलाकर पीने से कफ से उत्पन्न गुल्म में लाभ होता हैं।
[नजलानया जुकाम :- 10 ग्राम अजवाइन को एक साफ कपड़े में बांधकर पोटली बनाकर तवे पर रखकर गर्म कर लें। इसको बार-बार नाक से सूंघने से बंद नाक खुल जाती है और जुकाम भी ठीक हो जाता है नाक का गंदा पानी निकल जाता है और सिर का भारी होना भी ठीक हो जाता है।
[पेशाब में खून आना :-  3-3 चम्मच शर्बत बजुरी या अंजवार को आधा कप पानी में मिलाकर सोते समय लेने से पेशाब में खून आने के रोग मे लाभ होता है।
[बंद पेशाब खुल जाये :- ठंडी प्रकृति वाले रोगी को आधा चम्मच पिसी हुई अजवाइन शहद के साथ और गर्म प्रकृति वाले को आधा चम्मच पिसी हुई अजवाइन सिरके के साथ देने से बंद पेशाब आने लग जाता है।
[एक्जिमा के रोग में :- अजवाइन को पानी के साथ पीसकर लेप करने से एक्जिमा कुछ दिनों में ही समाप्त हो जाता है।
[योनि के रोग में :- 20 ग्राम अजवाइनसुआ 20 ग्रामवायविडंगवायंकुम्बा 10 ग्राम और सूखा लहसुन ग्राम को कूटकर योनि की धूनि (धुँआ) करने से योनि में होने वाली बीमारियां कम होती हैं।
[उपदंश (सिफिलिसके रोग :- अजवाइन की भूसी 20 ग्रामसरसों 20 ग्राम और कालीमिर्च 20 ग्राम इन सबको कूट-पीसकर पानी के साथ घोटकर बेर के बराबर गोलियां बनाकर खाने से उपदंश का रोग खत्म होता है।
[चेहरे की झांई के लिए :- अजवाइन को पीसकर और पानी में मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की झांइयां दूर हो जाती है।
[फोड़ा (सिर का फोड़ाहोने पर :- अजवाइननीम के पत्ते और शीशम के पत्तों को तवे पर जलाकर उनकी राख (भस्म) में छोटी इलायची और घी मिलाकर लगाने से फोड़े और फुन्सियां खत्म हो जाती हैं।
[पसलियों का दर्द :- 250 ग्राम अजवाइन एक चम्मच में लेकर पानी में उबालेंचौथाई भाग शेष रहने पर काढ़े को छानकर रात को सोते समय गर्म-गर्म करके चम्मच रोजाना रात को पीकर सो जायें। ऐसा करने से 2-4 दिन में ही रोग में आराम मिलता है।
[मानसिक उन्माद (पागलपन) :- आधा चम्मच अजवाइन को मुनक्का के साथ पीसकर आधा कप पानी में घोलकर रोजाना बार देने से और इसको लम्बे समय तक पिलाने से पागलपन या उन्माद दूर हो जाता है।
[विसर्प (फुंसियों का दल बनना) :- अजवाइन को पानी में उबाल लें और इस पानी से फुंसियों को धोयें। अजवाइन को गर्म पानी के साथ पीसकर फुंसियों पर लेप करने से फुंसियां ठीक हो जाती हैं।
[बालातिसार और रक्तातिसार :- अजवाइन का चम्मच रस रोजाना दो बार देने से काफी लाभ होता है।
[लिंग दोष :- 10-10 ग्राम अजवाइन खुरासानी और सफेद राई को हल्का बारीक पीसकर कूट-छानकर 200 मिलीलीटर पानी में रात को भिगोकर रख दें। सुबह उसे पानी में ही हाथ से मसलकर उससे लिंग को धोने से लिंग के इन्द्री दोष दूर हो जाते हैं।
[आग से जल जाने पर :- आग से जल जाने पर जंगली अजवाइन के रस को घी में मिलाकर लगाने से लाभ होता है।
[नाड़ी का छूटना :- अजवाइन का चूर्ण बनाकर हाथ व पैरों पर मलने से लाभ होता है। शरीर से पसीना का आना कम हो जाता है।
[नाड़ी का दर्द :- लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग खुरासनी अजवाइन को पीसकर सुबह-शाम लेने से नाड़ी दर्द में आराम मिलता है।
[टांसिल का बढ़ना :- 1 चम्मच अजवाइन को गिलास पानी में डालकर उबाल लें। फिर इस पानी को ठंडा करके उससे कुल्ला और गरारे करने से आराम आता है।
[गण्डमाला (स्कोफुला) :- 2 शुद्ध भिलावा (मेला), 2 अजवाइन और भाग पारद को पीसकर चने के बराबर की गोलियां बना लें। गोली रोजाना दही के साथ सुबह और शाम रोगी को देने से लाभ होता है। गण्डमाला (गले की गांठों) में आराम आता है।
[गर्दन में दर्द :- अजवाइन को पोटली में बांधकर तवे पर गर्म कर लें। फिर इस पोटली से गर्दन की सिकाई करें।
[बंद आवाज खोलना :- चने की दाल के बराबर अजवाइन का चूर्ण लेकर पान में रखकर चबाएं और उसका रस निगल लें।

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